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13 दिन पहले से ही अजित पवार ने दे दिया था बगावत का इशारा, लेकिन फिर भी नहीं समझ पाए चाचा शरद

महाराष्ट्र में शनिवार सुबह से सियासी घमासान जोरों पर है. यहां एनसीपी नेता अजित पवार ने अपने चाचा और पार्टी सुप्रीमो शरद पवार से बगावत करके बीजेपी को समर्थन दे दिया. इसे लेकर तरह-तरह की खबरें सामने आ रही है. पूरी खबर विस्तार से पढ़ाए यहां पर

अजित के समर्थन के बल पर देवेंद्र फडणवीस ने दोबारा राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. सरकार गठन का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जिस पर अब सोमवार को सुनवाई होगी. हालांकि इस बीच सवाल यही उठ रहा है कि आखिर सियासत के धुरंधर शरद पवार को उन्हीं के भतीजे अजित पवार ने आखिर कैसे धोखा में रखा. इसे लेकर तरह-तरह की खबरें सामने आ रही है. अजित पवार ने 10 नवंबर को ही शरद पवार के सामने बीजेपी के साथ जाने की मंशा जता दी थी, लेकिन पवार ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया. इसके बाद वे लगातार बीजेपी से बातचीत करते रहे. अजित पवार ने 17 नवंबर को शरद पवार के साथ पुणे में हुई बैठक में ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि वो बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने जा रहे हैं.

बैठक में अजित ने ये कहकर सबको चौंका दिया था कि वो शिवसेना और कांग्रेस के साथ गठबंधन के पक्ष में नहीं हैं. एनसीपी को बीजेपी के साथ सरकार बनाने में मदद करनी चाहिए. हालांकि उस समय उनके इस प्रस्ताव को माना नहीं गया. उस वक्त सरकार बनाने को लेकर एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस के बीच बातचीत आखिरी दौर में पहुंच गई थी.

सरकार बनाने को लेकर अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस के बीच पहली बार 10 नवंबर को बातचीत हुई थी. जिसके बाद से दोनों नेताओं के बीच हर दिन बातचीत हो रही थी. इसकी जानकारी एनसीपी में सिर्फ धनंजय मुंडे और सुनील तटकरे को ही थी.आपको बता दें कि सुनील तटकरे अजित पवार के बेहद करीबी माने जाते हैं, जबकि धनंजय मुंडे को फडणवीस का करीबी माना जाता है.

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