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दु:खद-: अभी अभी भारतीय संगीत में दौड़ी शोक की लहर, नही रहें दिग्गज संगीतकार…….😢सदमें में डूबी पूरा देश..

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प्रसिद्ध साहित्यकार मंज़ूर ए’हतेशा’म हमारे बीच नहीं रहे. उनका इंत’का’ल हो गया. साहित्य सेवा के लिए उन्हें पद्मश्री सहित कई पुरस्कारों से नवा’ज़ा गया था. उनका जाना साहित्य जगत के लिए अपूर्णीय क्षति है.

मं’ज़ू’र ए’ह’तेशा’म का भोपाल से नाता था. उनका जन्म यहां 3 अप्रैल 1948 को हुआ था. वो बड़े कहानीकार और साहित्यकार थे. मंजूर साबह की शिक्षा देश के प्रतिष्ठित अ’लीग’ढ़ मु’स्लि’म विश्वविद्यालय से हुई. साल 1976 में उनका पहला उपन्यास ‘कुछ दिन और’ प्रकाशित हुआ. हालांकि, उससे 3 साल पहले 1973 में उनकी पहली कहानी रम’जा’न की मौ’त प्रकाशित हो चुकी थी. मंजूर साहब के ब’शा’रत मंज़िल और पहल ढलते कई कहानियों और उपन्यास में से दो ऐसे उपन्यास थे जो उनके अपने शहर भोपाल से वा’स्ता रखते थे. इन दोनों उपन्यासों में उन्होंने नवाबी दौर के बाद भोपाल की बदलती परंपराओं पर फोकस था.

3 अप्रैल 1948 को भोपाल में जन्मे मंजू’र एहतेशाम (73) साहित्य जगत की मशहूर शख्सियत रहे हैं। उन्होंने पांच उपन्यास समेत कई कहानियां और नाटक लिखे हैं। उन्हें साल 2003 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। इसके अलावा उन्हें भारतीय भाषा परिषद का पुरस्कार, श्रीकांत वर्मा स्मृति सम्मान, वागेश्वरी अवॉर्ड एवं पहल सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। उल्लेखनीय है