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नागरिकता संशोधन विधेयक: राज्यसभा में सरकार की परीक्षा, जानें पूरा गणित

पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के गैरमुस्लिम शरणार्थियों के लिए भारत में नागरिकता का रास्ता साफ करने वाले नागरिकता संशोधन विधेयक पर अब राज्यसभा में सरकार की असली परीक्षा है. यह बिल राज्यसभा में कल पेश किया जाएगा. लोकसभा में बहुमत होने के कारण सरकार 80 के मुकाबले 311 वोटों से बिल को पास करवाने में कामयाब रही, लेकिन संसद के ऊपरी सदन का गणित दूसरा है. सरकार का राज्यसभा में बहुत मत है, ऐसे में नंबर गेम अहम हो गया है. बीजेपी को उम्मीद है कि सरकार जिस तरह तीन तलाक विधेयक और आर्टिकल 370 हटाने को लेकर राज्यसभा से पास करवाने में सफल रही थी, उसी रणनीति और गणित के जरिए नागरिकता संशोधन बिल पर भी मुहर लगवा दी जाएगी. आइए समझते हैं राज्यसभा का क्या है गणित…

एनडीए के सबसे बड़े दल बीजेपी के राज्यसभा में 83 सांसद हैं. वहीं, जनता दल यानी जेडीयू के 6 सांसद हैं. ध्यान रहे कि बिहार की सत्ता पर काबिज नीतीश कुमार की पार्टी ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन किया है. इसके अलावा, एनडीए में शिरोमणी अकाली दल के तीन, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के एक जबकि अन्य दलों के 13 सदस्य हैं. इस तरह एनडीए गठबंधन के अपने 106 राज्यसभा सांसद हैं. यहां ये भी बता दें कि जेडीयू ने लोकसभा में भले बिल का साथ दिया, लेकिन पार्टी में इसको लेकर दो स्वर हैं. जेडीयू नेता प्रशांत किशोर इसके खिलाफ खड़े हैं।

वहीं विपक्षी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन में कांग्रेस के सबसे ज्यादा 46 सांसद हैं. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल और शरद पवार की नैशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के चार-चार सांसद हैं। इनके अलावा द्रविड़ मुनेत्र कषगम के अपने पांच सांसद है जबकि अन्य यूपीए सहयोगियों के तीन सांसद हैं। यानी, यूपीए के कुल 62 राज्यसभा सांसद हैं.

ऊपर के आंकड़ों के मुताबिक, एनडीए के 106 सांसदों के साथ बिल के समर्थन में आनेवाले अन्य 28 सांसदों और 3 नामित सांसदों को जोड़ दिया जाए तो आंकड़ा 137 तक पहुंच जाता है। वहीं यूपीए के 62 और विरोध में वोटिंग करने वाली नौ पार्टियों के 44 सांसदों को मिलाकर 106 का आंकड़ा आता है। इसमें एक नामित सदस्य का वोट जोड़ने पर यह आंकड़ा 107 तक पहुंचता है. हमारी संसद के ऊपरी सदन यानी राज्यसभा में 245 सीटें हैं. हालांकि, मौजूदा स्ट्रेंथ 240 सांसदों का ही है क्योंकि पांच सीटें खाली हैं। इसलिए इस सदन में बहुमत का आंकड़ा 121 का होता है। स्पष्ट है कि 137 सांसदों के समर्थन से सत्ताधारी गठबंधन नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 को राज्यसभा से भी पास करवाने में सफल हो सकता है।

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