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आप भी जानिए मन्दिरों में जो बाल कटाए जाते हैं उनका क्या होता है?

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भारतीय संस्कृति अपने आप में बहुत महत्व रखती है,हिन्दू परम्पराओ के अनुसार लोग कई संस्कार करते है,मुंडन हिन्दू धर्म में विशेष संस्कार है,भारत के अनेकों प्रसिद्ध मंदिरों में अपनी श्रद्धा व मान्यता के अनुसार हजारों लोग मुंडन कराते हैं। सनातन परंपरा में अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर या किसी विशेष अवसर पर मुंडन संस्कार सामान्य है। पर क्या आपने कई ये विचार किया है की आखिर इन बालो का होता क्या है ? आपमें से कई लोग सोचते होंगे की इन बालो को कचरे के डिब्बे में फेंक दिया जाता है,आप भी ऐसा ही मानते है तो आप ये लेख ध्यान से पढ़े,जिससे की आपको ये मालूम हो जाये की आखिर इन बालो का क्या होता है ?


आपको जानकर है’रानी होगी की आपके इन बालो से एक बड़ा व्यापार होता है, क्योंकि मुंडन के बाल बेचे जाते हैं और यह कोई छोटा-मोटा व्यापार नहीं है। अब ये व्यापार अरबों रुपये का हो चुका है। भारतीय महि’लाओं के मुं’डवाये हुए बालों का मूल्य पश्चिमी देशों में बहुत ही अच्छा प्राप्त हो जाता है।

इन बालों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में निर्यात कर दिया जाता है। वहां इनका उपयोग पार्लर में और अच्छे विग बनाने मे किया जाता है। अब यदि व्यापार होता ही है तो साथ में अवै’ध व्यापार भी तो होगा। कभी-कभी कुछ लोग म’हिलाओं को ब’हलाक’र या लालच देकर बा’ल दान करा देते हैं और उसे बेच देते हैं। इन देशों में भा’रतीय स्त्रि’यों के बालों की अ’त्यधिक मांग है। इसके पीछे अनेकों कारण हैंं।

इन मंदिरों में बाल मुंडवाने वाली महिलाएँँ अपनी आस्था के कारण ये कार्य करती हैं। चूँकि उन्होंने मुंडन पहली बार कराया होता है, अतः उनसे उतारे गये बाल खूबसूरत, लम्बे, सीधे व चमकदार होते हैं। इसीलिए इनकी मांग भी अधिक होती है। इन महिलाओं ने अपने बालों को ना तो रंगा होता है और ना ही अधिक शैम्पू का प्रयोग किया होता है, अतः उनके बाल टूटे या दोमुंहे नहीं होते। नारीयल के तेल के अधिक प्रयोग से भी इनके बाल अधिक घने, चमकदार, लम्बे एवं मुलायम होते हैं। इनकी मांग तो होनी ही है ।