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इस बड़ी वजह के कारण 2 करोड़ भारतीयों ने छोड़ा DTH सर्विस का साथ!

टेलिविजन और ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर के लिए टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से अनाउंस किए गए नए रेग्युलेशंस के बाद डीटीएच प्लान महंगे हुए हैं। साथ ही केबल का बिल भी आसमान छू रहा है। ट्राई की ओर से भले ही कस्टमर्स को उनकी पसंद के चैनल सेलेक्ट करने और देखने को मिल रहा हो पर उनके लिए ही पेमेंट करने का ऑप्शन नए नियमों के अनुसार दिया गया लेकिन लगता है कि कस्टमर्स का डीटीएच सर्विसेज से मोहभंग हो चुका है। पिछले साल की दूसरी तिमाही के मुकाबले इस साल केबल बिल करीब 25 प्रतिशत महंगे हुए हैं। यही वजह है कि भारतीय डीटीएच और केबल सर्विसेज छोड़ रहे हैं।

मार्च, 2017 में टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने ब्रॉडकास्टिंग और केबल सर्विसेज के लिए नया फ्रेमवर्क तैयार किया, जिसे 29 दिसंबर, 2018 से लागू किया गया। इन नियमों के हिसाब से कंज्यूमर्स को उनकी पसंद के चैनल सेलेक्ट करने और केवल उनके लिए ही भुगतान करने का विकल्प मिला। पहले माना जा रहा था कि ऐसा होने के बाद सब्सक्राइबर्स को कम पैसे देने होंगे अपने प्लान के लेकिन इसका उल्टा ही हुआ। बेसिक से लेकर प्रीमियम प्लान्स तक महंगे हो गए और चैनल चुनने की जगह सब्सक्राइबर्स को चैनल पैक चुनने का विकल्प मिला, जो उन्हें रास नहीं आया।

2 करोड़ सब्सक्राइबर्स काम हुए

ट्राई की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि डीटीएच सर्विस का एवरेज ऐक्टिव सब्सक्राइबर बेस इस साल की पहली तिमाही जनवरी-मार्च में लगभग 7.2 करोड़ यूजर्स का था। 30 जून को खत्म हुई पिछली तिमाही तक इसमें 25 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और लगभग 5.4 करोड़ ऐक्टिव डीटीएच सब्सक्राइबर्स बचे हैं। CRISIL और CARE की रिपोर्ट्स में सामने आया है कि टैरिफ ऑर्डर लागू होने के बाद बिल में कमी होने की जगह बढ़ोतरी देखी गई है। कई यूजर्स ने फ्रीडिश का इस्तेमाल शुरू किया, जिसके चलते छोटे चैनल जैसे बिहार का दंगल टीवी रातोंरात सबसे ज्यादा देखे जाने वाले चैनलों में शामिल हो गए और इन्होंने कलर्स, स्टार टीवी तक को पीछे छोड़ दिया है

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