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म’हात्मा गां’धी जी के प’ड़पोते ने खो’ला उनसे जी’वन से जु’ड़ा का’ला स’च, जा’नक’र है’रा’न हो जा’एंगे आप….

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इ’स दुनि’या में ह’र को’ई अ’पने आ’प को सब’से बे’हतर बना’ना चाह’ता है. वो सो’चता है कि उस’की तुल’ना में को’ई और व्य’क्ति उस’से उ’त्तम हो ही न’हीं स’कता. ले’किन भग’वान ने ह’म इंसा’नों को बना’या ही इ’स त’रह से है कि इ’स दु’निया में को’ई भी उ’त्तम न’हीं है. स’भी में कि’सी न कि’सी तर’ह की खा’मियां हो’ती ही हैं. आ’ज ह’म आ’पको ए’क ऐ’से व्य’क्ति के बा’रे में बता’ने जा र’हे हैं. जिस’का जी’वन ह’मेशा से ही क’रोड़ों लो’गों के लि’ए प्रे’रणा का स्व’रुप है. लो’ग उ’नके बा’रे में ग’लत ना बो’लते और ना गल’त सुन’ते हैं. ले’किन आ’ज उ’न्हीं के परि’वार के एक स’दस्य ने उन’के जी’वन के कु’छ र’हस्यों से प’र्दा उठा’या है. ह’म जिस’की बा’त क’र र’हे हैं वो को’ई और न’हीं ब’ल्कि भा’रत के राष्ट्र’पिता, बा’पू के ना’म से प्र’सिद्ध मोह’नदास कर्म’चंद्र गां’धी हैं. वै’से दे’खा जा’ए तो गांधी’जी कि’सी के परि’चय के मो’हताज़ न’हीं है. ले’किन आ’ज उ’न्हीं के पड़’पोते ने उन’के बा’रे में ए’क ब’ड़ा खुला’सा कर’ते हुए उन’के जी’वन से जु’ड़े ए’क ब’हुत ही अ’हम कि’स्से का उजा’गर कि’या है. जि’से जा’नने के बा’द, जो लो’ग उ’न्हें वि’श्व का स’बसे उ’त्तम व्य’क्ति मा’नते हैं. शा’यद उन’के ज़’हन से ये गलत’फहमी दू’र हो जा’ये. तो अ’ब आप’को बता’ते हैं, कि उन’के पड़’पोते ने ऐ’सा क्या बो’ला.

दरअ’सल, दो दि’न पह’ले म’हात्मा गां’धी के पड़’पोते तु’षार गां’धी ने ए’क ट्वी’ट क’रते हु’ए क’हा, कि गांधी’जी ह’मेशा स’ही न’हीं हो’ते थे. उन्हों’ने जि’स तर’ह अप’ने बे’टे मणि’लाल के ए’क मुस्लि’म ल’ड़की से प्रे’म विवा’ह प’र रो’क ल’गाई, उ’स मा’मले में वो गल’त थे. इस’से उ’नका बे’टा उन’से का’फी ख’फा भी हु’आ था.

ब’ता दें कि गां’धीजी अ’पने जी’वन में का’फी ल’म्बे सम’य त’क ना के’वल अं’तर धा’र्मिक ब’ल्कि अं’तर जा’तीय शादि’यों के खि’लाफ थे. उन्हों’ने ज’हां अ’पने दूस’रे बे’टे मणि’लाल को ए’क मुस्लि’म लड़’की से प्रे’म वि’वाह कर’ने से रो’का. तो व’हीं सब’से छो’टे बे’टे की अंतर’जातीय शा’दी को भी क’ई सा’ल के लि’ए रो’क दि’या था औ’र उ’नका सोच’ना था कि शाय’द ये कर’ने से उन’के दिमा’ग से प्रे’म विवा’ह का फि’तूर उ’तर जाए’गा.

दरअ’सल, मणि’लाल को ए’क मु’स्लिम लड़’की से प्रे’म सं’बंध था. उ’नका ये रि’श्ता क’रीब 14 व’र्षों त’क च’ला था. वो उ’स ल’ड़की से शा’दी भी कर’ना चाह’ते थे. ले’किन ज’ब इ’स बा’रे में गां’धी जी को प’ता च’ला तो उन्हों’ने मणि’लाल को सम’झते हु’ए इ’स वि’वाह से सा’फ़ इंका’र क’र दि’या. फि’र उन’की शा’दी अ’पनी ही जा’त की लड़’की से तुरं’त क’रा दी.

इ’न स’ब से ये सा’फ़ प्र’तीत हो’ता है कि गां’धी जी ना के’वल अंतर’धार्मिक ब’ल्कि अंतर’जातीय शादि’यों के खिला’फ भी थे. उन’का मान’ना था, कि इस’से सामा’जिक और धा’र्मिक सद्भाव’ना को चो’ट पहुं’चती है. लिहा’जा हिं’दू ध’र्म में अंतर’जातीय औ’र अंतर’धार्मिक शादि’यों प’र रो’क हो’ना उचि’त है. हालां’कि 1930 के दश’क में उन्हों’ने अप’नी ये धार’णा बद’ल ली थी.

ब’ता दें कि मणि’लाल को गां’धीजी के द’क्षिण अफ्री’का में वि’श्वस्त सह’योगी यु’सुफ गु’ल की बे’टी फाति’मा से प्या’र हो ग’या था. मणि’लाल औ’र फा’तिमा बच’पन से ए’क सा’थ र’हे थे और शा’यद स’मय के सा’थ इन’के बी’च की दो’स्ती प्या’र में ब’दल ग’यी.  हालां’कि उ’स स’मय मणि’लाल को लग’ता था कि उ’नके पि’ता शा’दी के लि’ए मा’न जा’एंगे क्यों’कि उन्हों’ने बचप’न से ही अप’ने ब’च्चों को ध’र्म समा’नता की शि’क्षा दी थी औ’र सि’खाया था कि उ’न्हें स’भी ध’र्मों के लो’गों के सा’थ प्रे’म से रह’ना चाहि’ए. लिहा’जा उ’स व’क्त ब’च्चों के दि’माग में क’भी आ’या ही न’हीं हो’गा, कि ध’र्म भी ए’क दी’वार हो सक’ती है. वो दी’वार ख’ड़ा क’रने वा’ले और को’ई न’हीं ब’ल्कि खु’द उ’नके पि’ता हों’गे.

मणि’लाल ने 1926 में अप’ने से छो’टे भा’ई राम’दास के ज’रिए पि’ता को संदे’श भे’जा कि वो टि’म्मी उ’र्फ़ (फा’तिमा) से शा’दी कर’ना चा’हते हैं. लिहा’जा म’णि को उम्मी’द थी कि पि’ता मा’न जा’एंगे, लेकि’न पि’ता ने जवा’बी तौ’र प’र जो प’त्र भे’जा, उ’से दे’ख कर मणि’लाल के पै’रों से जं’मीन खिस’क ग’ई.

प’त्र के जवा’ब में गां’धी जी ने म’णिलाल के सा’रे स’पने तोड़’ते हु’ए क’हा, कि “अग’र तु’म हिं’दू हो और तुम’ने फा’तिमा से शा’दी क’र ली औ’र शा’दी के बा’द भी वो मु’स्लिम ही र’ही तो ये ए’क ही म्या’न में दो तल’वारों जै’सा हो जाए’गा. त’ब तु’म अप’नी आ’स्था से हा’थ खो बैठो’गे. ज’रा ये भी सो’चो कि जो ब’च्चे पै’दा हों’गे, वो कि’स ध’र्म औ’र आ’स्था के प्र’भाव में हों’गे.”

“ये ध’र्म न’हीं अ’धर्म हो’गा, अ’गर फा’तिमा केव’ल शा’दी के लि’ए अप’ने ध’र्म को बद’लना भी चा’हे तो भी ठी’क न’हीं हो’गा. आ’स्था को’ई कप’ड़ा न’हीं, जो आ’प इ’से कप’ड़े की तर’ह बद’ल लें. अ’गर को’ई ऐ’सा क’रता है तो ध’र्म और घ’र से बहि’ष्कृत क’र दि’या जाए’गा. ये कत’ई उचि’त न’हीं. ये रि’श्ता बना’ना समा’ज के लि’ए भी हित’कर. ये हिं’दू मुस्लि’मों प’र अ’च्छा अ’सर न’हीं डा’लेगी. अं’तर धा’र्मिक शा’दी कर’ने के बा’द ना तो तु’म दे’श की से’वा के ला’यक र’ह जा’ओगे औ’र ना ही फी’निक्स आ’श्रम में रह’कर इंडि’यन ओपि’नियन वी’कली नि’काल सको’गे. तुम्हा’रे लि’ए भार’त आ’ना मुश्कि’ल हो जाए’गा. मैं बा से तो इ’स बा’रे में क’ह भी न’हीं सक’ता, वो तो इस’की अनु’मति दे’ने से र’हीं.”

नती’जा ये हु’आ, कि म’णि ब’हुत नि’राश हु’ए. वो स’मझ ग’ए कि पि’ता से इ’सकी अनुम’ति न’हीं मि’लने वा’ली. आज्ञा’कारी बे’टे की त’रह उन्हों’ने फा’तिमा से शा’दी के लि’ए म’ना क’र दि’या. लेकि’न गां’धी के लि’ए इ’स व्यवहा’र के लि’ए म’णि उ’न्हें जीवन’भर मा’फ न’हीं क’र पा’ए.