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पद्मश्री नाटककार का हुआ निधन, साहित्य के क्षेत्र में छाई शोक की लहर

हिंदी के प्रसिद्ध उपन्यासकार कथाकार, नाटककार और आलोचक गिरिराज किशोर का कल निधन हो गया. उन्होंने 83 वर्ष की आयु में दुनिया को अलव‍िदा कह दिया. आपको बता दें कि उन्होंनें अपने लोकप्रिय उपन्यासों जैसे‘ढाई घर’ और ‘पहला गिरमिटिया’ के लिए हमेशा याद किया जाएगा.

जानकारी के मुताबिक गिरिराज किशोर का रविवार को सुबह कानपुर में उनके आवास पर हृदय गति रुकने से निधन हो गया. उनके निधन के बाद से साहित्य के क्षेत्र में शोक की लहर छा गई है. गिरिराज किशोर मुजफ्फरनगर निवासी है और कानपुर में रह रहे थे. वो कानपुर के सूटरगंज में रहते थे. सोमवार को सुबह 10:00 बजे उनका अंतिम संस्कार होगा. उनके परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है. आपको बता दें कि तीन महीने पहले गिरने के कारण गिरिराज किशोर के कूल्हे में फ्रैक्चर हो गया था जिसके बाद से वह लगातार बीमार चल रहे थे.

गिरिराज किशोर के सम-सामयिक विषयों पर विचारोत्तेजक निबंध विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहे. साल 1991 में प्रकाश‍ित उनके उपन्यास ‘ढाई घर’ को 1992 में ही ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था. आपको बता दें कि उन्हें ‘पहला गिरमिटिया’ उपन्यास भी बहुत चर्चा में रहे है, इसी उपन्यास ने उन्हें विशेष पहचान दिलाई थी. ये उपन्यास महात्मा गांधी के अफ्रीका प्रवास पर आधारित था. राष्ट्रपति द्वारा 23 मार्च 2007 में साहित्य और शिक्षा के लिए गिरिराज किशोर को पद्मश्री पुरस्कार से विभूषित किया गया.

उनके कहानी संग्रहों में ‘नीम के फूल’, ‘चार मोती बेआब’, ‘पेपरवेट’, ‘रिश्ता और अन्य कहानियां’, ‘शहर -दर -शहर’, ‘हम प्यार कर लें’, ‘जगत्तारनी एवं अन्य कहानियां’, ‘वल्द’ ‘रोजी’, और ‘यह देह किसकी है?’ प्रमुख हैं. इसके अलावा, ‘लोग’, ‘चिडियाघर’, ‘दो’, ‘इंद्र सुनें’, ‘दावेदार’, ‘तीसरी सत्ता’, ‘यथा प्रस्तावित’, ‘परिशिष्ट’, ‘असलाह’, ‘अंर्तध्वंस’, ‘ढाई घर’, ‘यातनाघर’, उनके कुछ प्रमुख उपन्यास हैं.