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भारत की ये खास साड़ी जिसकी नकल करने पर हो जाएंगी जेल

भारत देश कला और संस्कृति का देश हैं. यहां के लोगों में जितने संजीदा हैं उनके अंदर के गुण उतने ही बेहतरीन है. पूरे देश में अपनी हस्तकला के लिए जाना जाने वाला ये देश अपने अंदर बहुत सी संस्कृतियों को समेटे हुए है. भारत देश की पहचान यहां के रंग-बिरंगे परिधानों खासकर साड़ियों से भी है.

देश ही नहीं विदेशी महिलाओं को भी साड़ियां अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं. वैसे तो देशभर में तरह-तरह की रंग-बिरंगी साड़ियां मिलती हैं मगर यहां की पटोला साड़ी बेहद खास मानी जाती है इसकी बनावट से लेकर इसकी कीमत सभी खास है. इस साड़ी का बिजनेस बाकी किसी भी बिजनेस से बिल्कुल अलग है. रिपोर्ट के मुताबिक बताया गया है कि इस साड़ी के डिजाइन्स का कोई नकल कर ले तो उसे जेल भी हो सकती है।

आइए आपको बताते हैं भारत की परंपरा से जुड़ी इसी साड़ी के बारे में. साथ ही जानिए साड़ी का कीमत, इसे बनाने का तरीका, इसका इतिहास और सब कुछ. पटोला साड़ियों का इतिहास 900 साल पुराना बताया जाता है. इस आर्ट की चर्चा देश ही नहीं विदेश में भी होती है. खास बात ये है कि इस साड़ी का कोई इंडस्ट्रियल बिजनेस नहीं है. ये सिर्फ ऑर्डर के बाद ही बनाई जाती हैं. पूरे देश में केवल 3 परिवार ही हैं जो इस बिजनेस से जुड़े हुए हैं. ये तीनों ही परिवार पाटन(गुजरात) के हैं.

आपको बता दें कि प्योर सिल्क से बनीं ये साड़ियां ऑर्डर देने के बाद करीब 4 से 6 महीने में बनकर तैयार होती हैं. ये भारत की सबसे कीमती साड़ियों में शुमार हैं. जिनमें गुजरात की हस्तकला का बेशुमानर नमूना मिलता है. बताया जाता है कि 11वीं सदी में राजा भीमदेव की मृत्यु के बाद रानी उदयमती ने उनकी याद में एक बावली की निर्माण करवाया था. जिसे रानी की वाव के नाम से जाना जाता है.

इस वाव में वास्तुकला का बेजोड़ नमूना देखने को मिलता है. जिसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर में भी शामिल किया गया है. इसकी दीवारें मारू-गर्जर शैली में उकेरी गई हैं. इसी पैटर्न को आप पटोला साड़ियों की डिजाइन में उकेरा हुआ देख सकते हैं. अलग-अलग रंगों और धागों में पिरोई यह साड़ी बेहद खूबसूरत होती हैं।

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