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अब सिर्फ माता-पिता की ही नहीं, सास-ससुर की भी उठानी होगी जिम्मेदारी…

वरिष्ठ नागरिकों को किसी भी रूप में प्रताड़ित करना अब बेहद महंगा पड़ेगा. उन्हें अब छह महीने की जेल की सजा भुगतनी होगी. इसके अलावा बुजुर्गों के भरण पोषण की जिम्मेदारी अब सिर्फ बेटे की नहीं बल्कि बहु और दामाद की भी होगी. बुजुर्गों की हो रही उपेक्षा के खिलाफ बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर रोक लगाने के लिए लोकसभा में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण और कल्याण संशोधन बिल पेश किया गया.इस बिल के तहत बुजुर्गों की किसी भी शिकायतों का निपटान हर हाल में 60 दिनों के अंदर किया जाएगा. वरिष्ठ नागरिकों को परेशान करने पर छह महीने की सजा तय की गई है. साथ ही बुजुर्गों के पोषण के लिए नए प्रावधान बनाए गए हैं. उनके मासिक भरण पोषण की 10 हजार रुपये की ऊपरी सीमा को हटा लिया गया है. 



अब बेटे, बहू या दामाद की आय के अनुसार पोषण की राशि तय की जाएगी. हर जिले में बुजुर्गों के लिए विशेष पुलिस यूनिट का गठन होगा. सभी थानों में अधिकारी रखे जाएगा और अलग से हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जाएंगा. बिल में अब बालक की परिभाषा में पुत्रवधु व दामाद को भी शामिल किया है. यानि अब विशेष परिस्थिति में पुत्रवधु और दामाद को सास-ससुर के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उठानी होगी. वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक सुरक्षा की जरूरत है। उन्हें भी गरिमा पूर्ण जीवन जीने का अधिकार है।

विपक्ष के विरोध के बीच श्रम कल्याण कानूनों को एकबद्ध करने वाला सामाजिक सुरक्षा संहिता बिल लोकसभा में पेश किया गया. बिल के तहत श्रम कल्याण के लिए बने 44 कानून अब जल्द ही 4 तक सिमट जाएंगे. विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार इस बिल के जरिए श्रमिकों से कल्याण से जुड़े कई प्रावधानों को खत्म करना चाहती है. श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बिल में श्रमिकों के कल्याण से संबंधित सभी पक्षों को शामिल किया गया है. बिल का विरोध करते हुए आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने कहा, आईएलओ से जुड़ा हुआ है. इसके तहत सदस्य देशों को अपने यहां कर्मचारी कल्याण की व्यवस्था करना अनिवार्य है. तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने भी बिल को श्रमिक विरोधी बताया।



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