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बड़ी खबर-: अभी अभी ममता बनर्जी नें चल दी बड़ी चाल, मोदी शाह सहित दिग्गज नेताओं के छूटें पसीने़ं…….

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भाजपा के नेता पश्चिम बंगाल में तृणमूल कार्यकर्ताओं द्वारा हिंसा और पथराव की संभावना को देखकर पदयात्रा की योजना बनाने से ड’रते हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष के अनुसार राज्य में तृणमूल कांग्रेस के नेता भाजपा की राह रोकने के लिए हिंसा का सहारा ले रहे हैं, इसका खतरा लगातार बना हुआ है। वहीं तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में लोगों से जुड़ाव मजबूत करने के लिए पदयात्रा का सहारा लिया है। ममता बनर्जी दो दिन के लिए बीरभूमि पहुंच गई हैं। उन्होंने बाकायदा पैदल मार्च किया और इस मार्च में बाउल गायक बासुदेव दास भी शामिल हुए।

बाउल गायक के ही घर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 19-20 दिसंबर की यात्रा के दौरान खाना खाया था। पश्चिम बंगाल सरकार के वरिष्ठ मंत्री पार्थो चटर्जी ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि ममता बनर्जी राज्य के लोगों की नेता हैं। वह किसी के भी दरवाजे पर जाकर चारपाई खींचकर बैठ सकती हैं और घर में जाकर महिलाओं से सीधा संवाद करती हैं। वह गाड़ियों के काफिले के साथ रोड-शो करने वाली नेता नहीं है। राज्य सरकार के मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा कहते हैं कि भाजपा जिस झूठ का प्रचार कर रही है, वह कभी सफल नहीं होगा। अभी भी उसके पास मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं है।

बंगाल को पदयात्रा पसंद है
पश्चिम बंगाल में जनता को राजनीतिक पद यात्राएं काफी लुभाती हैं। भाजपा के उपाध्यक्ष राजकमल पाठक का भी मानना है कि पश्चिम बंगाल में पदयात्रा का काफी महत्व रहता है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष और उपाध्यक्ष राजकमल पाठक दोनों का कहना है कि राज्य की जनता बदलाव का मन बना चुकी है।

राजकमल पाठक कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्लस में और ममता बनर्जी की लोकप्रियता माइनस की तरफ बढ़नी शुरू हो गई है। केंद्रीय गृहमंत्री के रोड-शो में उमड़ा जन सैलाब इसका ग’वाह है। अब यह ममता बनर्जी की पदयात्रा से नहीं बदलने वाला है। इस बारे में तृणमूल कांग्रेस के रणनीतिकारों का कहना है कि जनवरी तक रुकिये। पश्चिम बंगाल में राजनीति की तस्वीर एक तरफा दिखाई देगी। शांतनु बनर्जी कहते हैं कि अब मुख्यमंत्री थोड़े-थोड़े समय के अंतराल पर लोगों के बीच में पदयात्रा करेंगी। अपनी जनता के बीच में होंगी और इसका असर दिखेगा।

ममता बनर्जी का नया दांव: बंगाल की अस्मिता
मां, माटी, मानुष से पश्चिम बंगाल में अपनी राजनीतिक धाक जमाने वाली ममता बनर्जी ने एक बार फिर बंगाल की अस्मिता का मुद्दा छेड़ दिया है। ममता बनर्जी ने गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर, नोबल पुरस्कार प्राप्त अर्थ शास्त्री अमर्त्य सेन के आत्म सम्मान को मुद्दा बनाना शुरू किया है। अमर्त्य सेन की टिप्पणी की भाजपा नेताओं ने आलोचना की है। ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा पश्चिम बंगाल की संस्कृति पर लगातार हमला बोल रही है। इसे खत्म करने की साजिश की जा रही है। उन्हें (मुख्यमंत्री) विश्वभारती पर भी की जा रही टिप्पणी पसंद नहीं है।

सलाहकार की भूमिका तक सिमटे प्रशांत किशोर
तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पिछले दो सप्ताह में ममता बनर्जी ने अपनी सक्रियता काफी बढ़ाई है। सूत्र का कहना है कि चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार अपना काम कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक अभियान को ममता बनर्जी ने फिर से अपने हाथ में ले लिया है। वह प्रशांत किशोर की सलाह पर ध्यान देती हैं और पश्चिम बंगाल के मिजाज को ध्यान में रखकर अब राजनीतिक अभियान को आगे बढ़ा रही हैं। सूत्र का कहना है कि मुख्यमंत्री के इस प्रयास से पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं के बीच में आ रहे अंतर को कम करने में काफी मदद मिलेगी। साथ ही, तृणमूल कांग्रेस ने अपनी पार्टी, नेताओं और उनकी ना’राजगी पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया है।