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जानिए, आखिर क्यों घोड़े की तरह बनना चाहतें है मर्द…देखें तस्वीर👇

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अक्सर हमने यह देखा और सुना है की म’र्दों की तुलना हमेशा से ही घो’ड़ों से की जाती है। लेकिन क्या आप जा’नते हैं कि इसके पीछे क्या कारण है। इसका प्रमुख कारण होता है घोड़े की श’क्ति, और द’र्द को बर्दा’श्त करने की क्षमता। म’र्दों और घो’ड़ों में और भी काफी सारी समा’नताएं होती हैं जिनकी वजह से उन्हे हमेशा घो’ड़ा बनने की स’लाह दी जाती है। तो आइये जानते है म’र्दो और घोड़ों की ये ख़ा’स बाते –

स’हन क्ष’मता – दरअसल घोड़ों में म’र्दों के मुकाब’ले दर्द को सहने की क्ष’मता तीन गुना ज़्यादा होती है। घोड़े की शक्ति की अगर बात की जाए तो घो’डा बिना किसी तरह की थका’वट के पूरे 23 घंटों तक अपनी पीठ पर भर उठा सकता है। घोड़े की यह खूबी हर कोई घर के म’र्द में देखना चाहता है।

काम करने की क्ष’मता – घोड़े की खा’सिय’त यह है कि वह खड़े होकर ही अपनी नींद पूरी कर लेता है, ले’किन अगर घो’ड़ा बैठ जाएं तो सम’झ लीजिए कि वह काफी बी’मार है। ठीक इसी तरह पु’रुषों से भी उम्मी’द की जाती है कि वह भी ज्या’दा से ज्या’दा काम करें।

घोड़े की यौ’न शक्ति – इतना ही नहीं घोड़े की यौ’न शक्ति दुनिया को अं’चभि’त करती है। ऐसा कहा जाता है कि घो’ड़ों की संता’नें कभी भी बां’झ नहीं रहती है। इन वजहों से ही म’र्दों को घोड़ा बनाने के लिए प्रे’रित किया जाता है और बस इन्हीं सब गु’णो की वजह से म’र्दों की तुलना गो’दे से की जाती है।