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यहां महिलाएं नहीं पहनती ब्लाउज, अगर किसी महिला ने धोके से भी पहन लिया तो…..

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महिलाएं साड़ी के साथ ब्लाउज़ पहनती है, क्योंकि वह उन्हें एक अगल आकर्षक लुक देता है। साथी शरीर के उपरी भाग को भी कवर करता है। लेकिन आज भी भारत में एक जगह ऐसी मौजूद है जहां महिलाएं साड़ी के साथ ब्लाउज़ नहीं पहनती हैं। जिसके पीछे एक अगल ही वजह छुपी है। चलिए जानते है…छ’त्ती’सग’ढ़ की आ’दिवा’सी म’हिलाएं अक्सर बिना ब्ला’उज़ के साड़ी प’हन’ती हैं। उन्हें यहां की एक प’रंपरा के अनुसार ब्लाउज पहनने की अ’नुमति नहीं है। इस परंपरा के अंत’र्गत महिलाएं ना तो खुद ब्ला’उज पहनती है और ना ही गांव की किसी और महिलाओं को इसे पहनने देती हैं।

यहां रहने वाले सभी लोग शुरू से अपनी परंपरा को निभाते चले आ रहे हैं। लेकिन हाल ही में ऐसी खबरें आई थी कि यहां रहने वाली कुछ महिलाओं ने ब्लाउज पहनना शुरू कर दिया है। जिस वजह से गांव वालों ने उन पर प’रंपरा की अ’वहेल’ना का आ’रोप भी लगाया।

यहां इस परंपरा को बचाने में पुराने लोग लगे हुए है। बिना ब्लाउज साड़ी पहनने को गातीमार स्टाइल कहा जाता है। यह परंपरा एक हजार साल से लोग निभाते चले आ रहे हैं। आदिवासी महिलाओं का कहना है कि बिना ब्लाउज़ के साड़ी पहनने पर काम करने में सुविधा होती है। ऐसे खेत में काम करना और बोझ उठाना काफी आसान हो जाता है। जबकि जंगली इलाकों में महिलाएं गर्मी की वजह से ब्लाउज पहनना पसंद नहीं करती। वहीं दूसरी तरफ शहरों में अब बिना ब्लाउज साड़ी पहनने का फैशन भी चलता दिखाई दे रहा है।