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भक्तों की हर इच्छा होती है पूरी, इस मंत्र के जाप से मु’र्दा भी हो जाता है जिंदा!!लेकिन…

धर्म

भारतीय शास्त्रों में महामृ’त्युंजय तथा गायत्री मंत्र दोनों को ही परम शक्तिशाली माना जाता है। इन दोनों मंत्रों को मिलाकर ‘मृ’त संजीवनी विद्या’ की रचना की गई है। मृ’त संजीवनी विद्या (मंत्र) के प्रयोग से मृ’त व्यक्ति को भी जीवित किया जा सकता है, बड़े से बड़े रोग से भी मु’क्ति पाई जा सकती है।


ऐसे करें पूजा
किसी भी शुक्ल पक्ष के सोमवार की सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान शिव की आराधना करें तथा इस मंत्र का 108 बार जप करें। इस प्रयोग से बड़ी से बड़ी बीमारी भी सहज ही ठीक हो जाती है।

मृत संजीवनी मंत्र इस प्रकार है-
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्‌ ॐ स्वः भुवः ॐ सः जूं हौं ॐ

इसके अलावा भी भगवान शिव के अन्य कई मंत्र हैं जिनकी सहायता से आप अपनी हर इच्छा पूरी कर सकते हैं। इन मंत्रों में शिव का पंचाक्षरी मंत्र और महामृ’त्युंजय मंत्र का स्थान सबसे उपर है। महामृ’त्युंजय मंत्र इस प्रकार हैं-

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

लघु महामृ’त्युंजय मंत्र
जो लोग महामृत्युंजय मंत्र का जाप नहीं कर सकते, उनके लिए लघु महामृ’त्युंजय मंत्र का विधान बताया गया है। रात को 9 बजे बाद लघु महामृ’त्युंजय मंत्र का जाप करते हुए भगवान शिव पर दूध मिश्रित जल चढ़ाने से बड़े से बड़ा रोग और सं’कट भी टल जाता है। लघु महामृ’त्युंजय मंत्र इस प्रकार हैं-

ॐ जूं सं:

पंचाक्षरी मंत्र
ॐ नमः शिवाय को ही शिव का पंचाक्षरी मंत्र कहा जाता है। इसका नियमित रूप से जाप करना सभी सं’क’टों से मुक्ति दिला देता है। साथ ही मृ’त्यु के पश्चात व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त होता है।

शिव भक्ति में मात्र शिव नाम स्मरण ही सारे सांसारिक सुखों को देने वाला है, विशेष रूप से शास्त्रों में बताए शिव उपासना के विशेष दिनों, तिथि और काल को तो नहीं चूकना चाहिए।