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रमजान के पाक महीने में मौलानाओं ने देश के मुसलमानों से की ये बड़ी अपील

कोरोना वायरस के संकट के बीच मुसलमानों का सबसे पवित्र महीना रमज़ान आज यानी की 24 अप्रैल से शुरू हो गया है. इस बार कोरोना वायरस के चलते मुसलमानों के लिए सब कुछ पहले जैसा नहीं रहने वाला है. दुनियाभर के मुस्लिमों के लिए रमज़ान का महीना इबादतों भरा होता है. आइए आपको बताते है कि इस बार रमज़ान के पाक महीने में क्या कुछ पाबंदियां है.

कोरोना की वजह से इस बार हालात अलग

पहले के सालों की तरह इस बार मस्जिदें गुलज़ार नहीं हो सकेंगी. लोगों को घरों में रह कर हर तरह की इबादत करनी होगी. मस्जिद में नमाज़ अदा करने की सूरत में लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर सेकेंगे. इससे कोरोना फैलने का खतरा बढ़ जाएगा. यही वजह है कि तमाम देशों की सरकारों के अलावा मुस्लिम धर्म गुरू भी लोगों से लगातार अपील कर रहे हैं कि रमज़ान के दौरान घर पर रह कर ही इबादत करें.

मालूम हो कि रमज़ान में मुसलमान सुबह सवेरे उठते हैं और सेहरी करते हैं और शाम को सूरज डूबने के बाद रोज़ा खोलते हैं, जिसे इफ्तार कहा जाता है. पहले के सालों में मस्जिदों में गरीबों के लिए इफ्तार का इंतज़ाम होता था, जहां सभी साथ बैठकर रोज़ा खोलते थे, लेकिन महामारी के चलते अब ये होना मुमकिन नहीं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी रमज़ान को लेकर खास सलाह दी है. संगठन ने कहा है कि जहां भी मुमकिन हो, लोग वर्चुअल रास्तों के ज़रिए सामाजिक और धार्मिक चीज़ों के लिए साथ जुड़ें. रमज़ान के महीने में सिर्फ मस्जिदों में ही रौनक नहीं होती, बल्कि बाज़ार भी खरीदारों से गुलज़ार रहते हैं. ऐसे में इस दफा लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से लोगों को बाज़ारों से भी दूर रहना होगा. ऐसे में साफ है कि दुनियाभर के मुसलमानों के लिए इस साल रमज़ान पहले जैसा नहीं रहने वाला है.