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क्या आप जानते है सर्दियों में सुबह सुबह मुंह से क्यों निकलती है भाप?

सर्दियों में सुबह सुबह मुंह से क्यों निकलती है भाप? दोस्तों सर्दियों में हमारे मुंह से भाप निकलने लगती है लेकिन जब हम घर के अंदर होते हैं तो ये भाप नहीं निकलती. आज हम आपको इसके बारे में बताने जा रहे है कि आखिर क्यों सर्दियों में हमारे मुंह से भाप निकलनी है. क्या ये शरीर में पानी गर्म होता रहता है जिसकी वजह से भाप निकलती है या फिर इसके पीछे कोई और वजह है, आइए जानते हैं.

दोस्तों श्वसन और पाचन के दौरान बननेवाला जल और हमारे द्वारा पिया गया जल भी मूत्र, पसीना, वाष्पीकरण द्वारा ही बाहर आता है. सर्दियों में शरीर से बाहर यानी की वायुमंडल का तापमान बहुत कम होता है. जैसे ही ये जलवाष्प सांस के साथ बाहर आती है, तुरंत ही संघनित होकर पानी की छोटी-छोटी बूंदों में बदल आती है और धुआ – सा दिखाई देने लगता है. गर्मियों में बाहर का तापमान अधिक होने के कारण ये जलवाष्प संघनित नहीं हो पाती है और तेजी से पुनः वाष्पीकरण हो जाता है जिस कारण ये दिखाई नहीं देता।

सांस लेने की क्रिया के दौरान हमारे शरीर में कार्बन डाईऑक्साइड और पानी बनते हैं. हमारे फेफड़ों में इस पानी का वाष्पीकरण करके, जलवाष्प के रूप में मुंह या नाक से बाहर निकाल दिया जाता है. श्वसन और पाचन की क्रिया के दौरान भी पानी बनता है और जो पानी हम हर दिन पीते है उसे भी मूत्र, पसीने और वाष्पीकरण द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है।

आपको बता दें दोस्तों कि पानी तीनों अवस्थाओं में होता है. ठोस, द्रव और गैस. ठोस होने पर पानी बर्फ, द्रव होने पर जल या पानी और गैसीय अवस्था में होने पर भाप कहलाता है. बर्फ में H2o के अणु मजबूती के साथ एक दूसरे से जुड़े होते हैं. द्रव अवस्था में थोड़ी कम मजबूती और गैसीय अवस्था में और भी कम मजबूती के साथ ये आपस में जुड़े होते हैं. गैसीय अवस्था में एच2ओ के अणुओं में ऊर्जा ज्यादा होती है जिससे ये गतिक अवस्था में होते हैं. मानव शरीर का औसत तापमान 37 डिग्री सेल्सियस होता है. ऐसे में जब बाहर का तापमान कम होता है और हम सांस बाहर छोड़ते हैं तो शरीर से निकलने वाली नमी के अणु अपनी ऊर्जा तेजी से खोने लगते हैं और पास-पास आ जाते हैं. इससे भाप द्रव या ठोस अवस्था में बदलने लगती है. ये भाप छोटी-छोटी पानी की बूंदों में होती है. अगर तापमान शून्य से ज्यादा नीचे हो जाता है तो मुंह से निकलने वाली भाप बर्फ में बदलने लगती है. ऐसा अक्सर तब होता है जब तापमान सात डिग्री सेल्सियस से कम होता है.

सर्दियों के दिनों में शरीर से बाहर यानी वायुमंडल का तापमान काफी कम होता है. ऐसे में जब ये जलवाष्प सांस के साथ बाहर आती है तो तुरंत संघनित होकर पानी की छोटी-छोटी बूंदों के बदल बन जाते हैं और धुआं सा दिखाई देने लगता है जिसे हम मुंह से भाप निकलना कहते हैं।

गर्मियों में शरीर से बाहर यानी वायुमंडल का तापमान बहुत ज़्यादा होता है इसलिए ये जलवाष्प बाहर आने पर संघनित नहीं हो पाती और वाष्पीकरण की क्रिया तेज़ी से होती है जिसके कारण गर्मियों में मुंह से भाप निकलती हुई दिखाई नहीं देती।

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