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कैसे लगती है फां’सी…..म’रने वाले के कान में क्या बोलता है ज’ल्लाद…..

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फां’सी का नाम सुनते ही एक अजीब सी घबराहट होने लगती है, रोंगटे खड़े हो जाते है, मौ’त दिखाई देने लगती है, कितना मुश्किल होता होगा उस व्यक्ति के लिए, जिसे ये काम करना पड़ता है ! क्या आपको पता है कि कैसा होता है ज’ल्लाद, कैसे लगाई जाती है फां’सी कैसा होता है फां’सी घर, क्या-क्या नियम है फां’सी लगाने के, क्या मानसिक स्थिति होती होगी उनकी जिन्हें ये तैयारी करनी होती है ! यदि नहीं तो चलिए आज हम आपको बताए है इन सारे प्रश्नों का जबाब जिन्हें सुन कर आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे !

फां’सी देने का समय : फां’सी देने का समय सुबह का होता है क्युकी उस समय सारे कैदी सो रहे होते है और साथ ही उनके घरवालो को आ’रोपी का सं’स्कार करने के लिए पूरा दिन मिल सके !
ज’ल्लाद बां’धता है आ’रो’पी के हाथ पैर : जैसे ही का’ल को’ठरी से दो’षी को लेकर आया जाता है ज’ल्ला’द उसके हाथ पीछे की तरफ बांध देता है फं’सी घर में और उसके पैरो के निचे एक सफ़ेद घेरा पहले ही खींच दिया जाता है ताकि फां’सी घर में आकर बिना समय न’ष्ट किये उसको उसी सफ़ेद घेरे में दोनों पैर रख कर खड़ा कर सके ! इस निशान के ऊपर ही वो रस्सी का फंदा होता है जिससे जिससे दो’षी को फां’सी दी जाती है ! फिर ज’ल्ला’द उसके पैर बाँध देता है
काले कपडे से इसलिए ढकते है मुह: का’लकोठ’री में ही आ’रोपी का मुह काले कपडे से ढक दिया जाता है ताकि वह ज’ल्ला’द को न देख सके या किसी और से नजर मिला कर गुस्से में कोई ह’रक’त न कर सके ! ताकि उसे अपने आसपास लोगो के होने का सिर्फ अ’हसा’स हो !
फां’सी का सामान : फां’सी देने के लिए ख’टका, रस्सी, रुमाल, रेत की बोरी का इस्तेमाल किया जाता है ! ज’ल्लाद अपनी भाषा में लीवर को ख’टका कहता है ! जैसे ही ज’ल्लाद लीवर दबाता है दो’षी के पैरो के निचे का तख्ता निचे की और खुल जाता है और उसका शरीर र’स्सी के साथ झूलने लगता है ! रस्सी की संख्या 3 होती है ! एक ही तख़्त पर 2 रस्सी लगायी जाती है ताकि एक के काम न करने पर दूसरी इस्तेमाल कर सके !
मे’जि”स्ट्रे’ट करता है लिखित काम : यदि आ’रोपी कोई व’सीय’त लिखना चाहता है तो ये काम मे’जिस्ट्रे’ट का होता है !
फां’सीघर का कु’याँ : फां’सी घर में जिस स्थान पर आ’रोपी को फां’सी दी जाती है ठीक उसी स्थान के निचे एक कु’यन होता है जिसकी गहरायी 2 से 3 मीटर की होती है कुए में जाने के किये 3-4 सीडियां होती है ! और कुएं में 3 व्यक्ति एक साथ परवेश कर सकते है
अंतिम इच्छा : फां’सी देने से पहले आरो’पी की अं’तिम इच्छा पूछी जाती है और उसे पूरा किया जाता है ! फां’सी देने से पहले उसे न’हला’या जाता है और नए कपडे पहनाये जाए है
कान में बोलता है : फां’सी देने से पहले ज’ल्ला’द आ’रोपी के कान में कहता है कि हिन्दू को राम राम, मु’स्लिम को स’लाम, कहा सुना माफ़ करना ये मेरा कर्म है !
फाँ’सीघर की प’हरेदारी : फां’सी घर का स्थान काफी सु’नसा’न होता है कोई भी वहा पह’रा देने से ड’रता है एक बार कि बात है कि ति’हाड़ जे’ल के फाँ’सीघ”र पर एक प’हरेदा’र अ’केला पह’रा दे रहा था और कुछ देर बाद उसे नीं’द की झ’पकी लग गयी और फिर अ’चानक उसने महसूस किया कि उसको किसी ने चां’टा मा’रा है ! इसके बाद भी उसके साथ ऐसा कई बार हुआ और अन्य प’ह’रेद’रो के साथ भी हुआ ! जब उन्होंने जि’लाधि’कारि’यो को बता तो उन्होंने इसे अ’न्धवि’श्वा’स बताया !