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ऐसी भी मो’हब्बत : ट्रेन से क’टकर प्रेमी की मौ’त, प्रेमिका ने उसकी याद में बनवाया ‘मिनी ताजमहल’….

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. भले ही शा’हजहां द्वारा मु’म’ता’ज के लिए बनवाया गया ता’जमह’ल पूरी दुनिया में प्रे’म की अद्वितीय निशानी हो, लेकिन श्यो’पुर के खोजीपुरा में एक प्रे’मिका द्वारा प्रे’मी की याद में बनवाया गया मक’बरा भी मिनी ताजमहल से कम नहीं है। हा’लांकि जानकारी के अभाव में खो’जीपु’रा का ये म’क’ब’रा गु’मना’मी में ही है, लेकिन लगभग 100 साल पहले बनाया गया ये म’कब’रा जिले में अटू’ट प्यार की अमर नि’शा’नी कहें तो कोई अ’ति’श्यो’क्ति नहीं होगी।

कहा जाता है कि रेलवे में पथ निरीक्षक की नौकरी करने वाले जौ’रा के अ’ब्दु’ल नाम के श’ख्स की ड्यूटी श्यो’पु’र-ग्वालि’य’र नै’रो’गे’ज रेल ला’इन पर श्यो’पुर क्षेत्र में थी। आगरा की रहने वाली एक महिला उनसे अ’टू’ट प्रेम करती थी। बताया जाता है कि उनकी ढो’ढर क्षेत्र के खो’जीपुरा के निकट ट्रै’क पर ही रेल से क’टक’र मौ’त हो गई। प्रेमी की याद में प्रे’मिका ने रे’ल ला’इन से कुछ ही दूरी पर एक म’क’ब’रे का नि’र्माण करा दिया। दो मंजिला ये म’क’ब’रा आज भी ढो’ढर क्षे’त्र में प्या’र की अ’टूट नि’शानी के लिए वि’ख्या’त है।

श्योपुर जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर ढो’ढर क्षेत्र के ग्राम खो’जीपुरा में श्यो’पु’र-ग्वा’लियर नैरो’गे’ज ट्रे’क के कि’नारे बना ये म’क’ब’रा दूर से ही अद्वितीय नजर आता है। हालांकि आसपास उगी झा’डि’य़ां और उब’ड़-खा’बड़ पत्थर म’क’बरे को बे’कद्री का शिका’र बना रहे हैं, लेकिन म’क’बरे के नि’र्मा’ण में बे’जोड़ न’क्का’शी और का’री’गरी ब’र’ब’स ही लोगों का ध्यान खीं’चती है।

रेलवे में नौकरी करने वाले अ’ब्दु’ल नाम के क’र्मचारी से आगरा की एक महिला बेइं’तहा प्यार करती थी। यही वजह है कि जब अ’ब्दुल की मौ’त हुई तो प्रे’मिका ने उसकी याद में खो’जीपुरा में ये म’क’ब’रा बनाया। लगभग 100 साल पुराने इस म’क’ब’रे की का’रीग’री और न’क्का’शी अ’नूठी है।