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आज देखिए कि’न्‍नरों का अं’तिम सं’स्‍कार, ऐसा करते हैं मृ’त शरीर के साथ…..😱

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समाज में स्‍त्री पुरूष के अलावा कि’न्न’रों का भी समूह मौ’जूद है जो कि बेहद अलग ही जीवन जीता है। लोग कि’न्‍न’रों के बारे में हर एक बात जानने के लिए उ’त्‍सुक रहते हैं। वहीं आपको बता दें कि ये एक ऐसा विषय है जिसके बारे में लोग आज भी खु’लकर बातें नहीं कर पाते हैं। यही कारण है कि इनके बारे में कई सारी बातें जानना चाहते हैं। कि’न्न’रों से जुड़ा एक विषय है जिसे काफी गो’पनी’य रखा जाता है वो है उनकी मौ’त से जुड़ा विषय, हर किसी के मन में ये स’वाल आता होगा कि जब किसी कि’न्नर की मौ’त होती है तो क्‍या होता होगा? तो आज हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें हम बताएंगे कि आखिर कि’न्‍न’रों के मौ’त के बाद आखिरकार किस तरह से उनका अंति’म सं’स्कार किया जाता है।

कि’न्नरों की दुनिया जितनी अलग है, इनके री’ति-रि’वाज़ और सं’स्कार भी उतने ही अलग है। समाज में इस समु’दाय को थ’र्ड जें’डर, ट्रां’स जेंड’र जैसे नामों से जाना जाता है। अगर बात करें इनके री’ति-रि’वा’ज और सं’स्कारों के बारे में तो शायद ये बात बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि जब कि’न्नरों की मौ’त होती है तो कि’न्नरों का अं’तिम सं’स्कार कैसे किया जाता है?

सबसे पहले तो ये बता दें कि कि’न्न’र की मौ’त के बाद कि’न्नरों का अं’तिम सं’स्का’र बहुत ही गु’प्त तरीके से किया जाता है। जब भी किसी कि’न्नर की मौ’त होती है तो उसे समुदाय के बाहर किसी गैर कि’न्नर को नहीं दिखाया जाता। माना जाता है कि ऐसा करने से म’र’नेवाला अगले जन्म में भी कि’न्न’र ही पैदा होगा। ज्‍या’दा’तर कि’न्नर हिंदू धर्म को मानते हैं और इस धर्म के अनुसार श’व को जलाया जाता है लेकिन कि’न्नरों के साथ ऐसा नहीं किया जाता। उन्हें दफ’नाने का रिवाज स’दियों से चला आ रहा है। कि’न्नरों के स’मुदाय में श’व को अ’ग्नि नहीं देते बल्कि उसे द’फ’नाते हैं।

किसी कि’न्न’र की मौ’त हो जाती है तो उसकी डे’ड बॉ’डी को सफ़ेद कपड़े में ल’पे’ट दिया जाता है और बॉ’डी पर कोई भी बंधी हुई चीज नहीं छोड़ी जाती। इसके पिछे कारण बताया जाता है कि ऐसा इसलिए किया जाता है क्‍योंकि उसकी आ’त्मा फ्री हो जाए और किसी तरह के बं’धन और रि’श्ते से वह हमेशा के लिए मु’क्त रहे। साथ ही आपको ये भी बता दें कि कि’न्‍न’रों के अं’तिम सं’स्कार करने से पहले उसके शव को जू’ते-च’प्प’लों से पीटा जाता है। कहा जाता है कि ऐसा करने से उसके इस जन्म में किए सारे पा’पों का प्रायश्चित हो जाता है।

समाज में आमतौर पर लोगों के म’रने पर उसे परिवार वाले शो’क मनाते हैं लेकिन वहीं कि’न्नरों में ऐसा नहीं होता है। उनके मौ’त पर शो’क नहीं मनाया जाता है बल्कि उनके परिवार वाले खुशियां मनाते हैं क्‍योंकि म’रने वाले को न’र’क रूपी जीवन से मु’क्ति मिल गई