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राकेश टि’कैत ने फिर किया इस तारीख के 40 लाख ट्रैक्टरों से दिल्ली घे’रने का ऐलान….सरकार के उडे़ होश…..

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इस बार दिल्ली के बोट क्लब पर खेती होगी। देश भर से 40 लाख ट्रैक्टर वहां जाएंगे। होली का सीजन आने वाला है अपनी फसल का’टकर सभी तैयार रहें। संयुक्त किसान मोर्चा के एक फोन पर दिल्ली पहुंचें। किसान नेता रा’केश टि’कैत के मिनी जा’टलैंड कहे जाने वाले कि’रावली में बुधवार को ऐसे त’ल्ख ते’वर दिखे। ये टिकै’त की यहां पहली म’हापं’चायत थी। इस दौ’रान टि’कैत केंद्र सरकार पर ही हम’लावर रहे। उन्होंने कहा कि ये आंदोलन अपनी जमीन बचाने का है। खेत बचाने का है। ये बड़ी कंपनियां हैं। इन्हें अपने खेत या देश से प्यार नहीं होता। मौ’का मिलते ही इन्हें क्षेत्र और देश बदलने में देर नहीं लगती। किसान की पगड़ी पर हाथ डालने वाली सरकार को परिणाम भुगतना होगा। अब कोई जात-धर्म नहीं। केवल किसान बिरा’दरी है। किसान धर्म-2021 ही पहचान होगा। दिल्ली आएं तो अपने खेत की मि’ट्टी लेकर आएं। इस बार उसी से होली होगी। का’नूनों की वा’पसी तक ये सं’घर्ष चलेगा।

पु’लिसवालों को जोड़ने की कोशिश
संबोधन के दौ’रान भी’ड़ के पीछे खड़े पु’लिसब’ल की ओर इशारा करते हुए टि’कैत ने कहा कि ये भी किसानों के बेटे हैं। इन्हीं पुलि’सवालों के लिए डेढ़ दशक पहले आंदोलन किया था। इनके मकान इतने छोटे होते हैं कि ये अपने परिवार और रिश्तेदारों तक को नहीं बुला पाते। इनके मकान का साइज बढ़ाने के लिए सरकार से कहा तो उसने कुछ नहीं किया। अब इसके लिए फिर आं’दोलन किया जाएगा।

नि’जीकरण व म’हंगाई पर ह:मला
टि’कैत ने कहा कि सब बेचा जा रहा है। बीए’सएन’एल ख’त्म होने के क’गार पर है। यही नहीं जिन रेल कर्मियों के दम पर रेलवे चलाई जा रही है, अगले साल तक उनमें से 4.5 लाख कर्मचारियों को बाहर निकालने की तैयारी है। ये बड़े लु’टे’रे हैं। इनसे देश को बचाना होगा। कहा कि महंगाई कहां जा रही है। सिलेंडर, डीजल-पेट्रोल के दाम कहां जा रहे हैं। अगर इनके दाम बढ़ेंगे तो गांव के आदमी का किराया बढ़ेगा। माल भाड़ा भी बढ़ेगा। किसान कहां जाएगा।