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प्रल’य की घड़ी’ ने किया ख’तरनाक इशारा, वि’नाश के क’गार पर है दुनिया….

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मान’वता के सामने प्रल’य (Doomsday) के ख’तरे को दिखाने वाली घड़ी ख’तर’नाक इशारा कर रही है. यह घड़ी मध्य’रात्री (Midnight) से करीब 100 सेकंड दूर है. घड़ी के कांटों का मध्य’रात्री तक पहुंचने का मत’लब है दुनिया में प्र’लय आने वाला है. खास बात है दुनिया को’रोना वाय’रस महामारी (Corona Virus Pandemic), न्यू’क्लि’यर यु’द्ध (Nuclear War) और जलवायु परिव’र्तन (Climate Change) से जूझ रही है. इस घड़ी ने 2020 में भी इतना ही समय बताया था.

बुलेटिन ऑफ द एटॉ’मिक साइं’टिस्ट (Bulletin of the atomic scientist) के अ’ध्यक्ष रेचल ब्रॉ:न्सन ने बताया ‘कयामत की घड़ी के कांटे मध्य’रात्री से 100 सेकंड दूर हैं.’ उन्होंने बताया कि कांटे मध्य’रात्री के पहले से ज्या’दा करीब हैं. ब्रॉ:न्सन ने वि’ज्ञान में भरोसे की कमी औऱ कोरोना वायरस महा’मारी से का सामना करने में पूरी तरह से कमी की बात कही है. बीते साल घड़ी मध्य’रात्री से 2 मिनट की दूरी पर थी, जो बाद में खिस’कर 100 सेकंड पर आ गई थी.

उन्होंने कहा ‘खतर’नाक और भय से प्रेरित कोविड-19 महा’मारी एक एतिहा’सिक वेक अप कॉल की तरह काम करता है. यह बताता है कि राष्ट्री’य सर’कारें और अंतररा’ष्ट्रीय संस्था’एं न्यूक्लि’यर हथि’यार और जल’वायु परि’वर्तन के खतरे का सामना करने के लिए तैयार नहीं थीं.’ हालांकि, यह सवाल है कि प्रलय की घड़ी क्या है और जब यह मध्य’रात्री तक पहुं’चेगी तो क्या होगा

इस घड़ी का निर्माण बुले’टिन ऑफ द एटॉ’मिक साइंटि’स्ट्स ने 1947 में किया था. यह एक नॉन प्रॉफिट ग्रुप है, जिसका गठन वैज्ञा’निक अ’ल्बर्ट आइं’स्टीन और यूनिव’र्सिटी ऑफ शिका’गो के छात्रों ने 1945 में किया था. इसके बोर्ड सद’स्यों में 13 नोबल पुर’स्कार विजेता हैं. प्रलय की घड़ी यह दिखाती है कि पृ’थ्वी त्रासदी से कितनी दूर है. इस घड़ी से पता लगाया जाता है कि न्यू’क्लि’यर घट’नाओं और जल’वायु परि’वर्तन के ख’तरों का असर दुनिया पर पड़ने में कितना समय है. बावा वैंगा ने भी 2021 को लेकर कई भवि’ष्यवा’णियां की हैं. उनकी भवि’ष्यवा’णी के हिसाब से मानवता के लिए साल 2021 खत’र’नाक साबित होने वाला है.