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पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी आएंगे सुप्रीम कोर्ट से ये अहम फैसले

सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में 70 साल से चले आ रहे अयोध्या विवाद पर से फैसला दिया था. साथ ही फ्रांस से 36 राफेल युद्धक विमानों की खरीद को भी हरी झंडी दी थी. इस लिहाज से उच्चतम न्यायालय के इतिहास में गत वर्ष काफी महत्वपूर्ण रहा। खासकर की राम जन्मभूमि विवाद में 40 दिनों की लगातार सुनवाई के बाद विभिन्न पृष्ठभूमि से आए पांचों जजों का एकमत होना काबिले तारीफ था. तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अयोध्या बेंच की अध्यक्षता भी सराहनीय रही थी. फैसला इस मायने में भी अनूठा था क्योंकि इसे लिखने वाले का नाम सामने नहीं आया.

राफेल जेट बनाने वाली फ्रेंच कंपनी दसॉ एविएशन के साथ अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस की ऑफेसट पार्टनर के रूप में जुड़ाव को लेकर भी देश में जमकर बवाल मचा था. मीडिया के एक खास वर्ग ने कुछ दस्तावेजों के आधार पर आशंकाएं प्रकट कीं तो सुप्रीम कोर्ट को एनडीए सरकार को दी गई क्लीन चिट के अपने फैसले पर पुनर्विचार करना ही पड़ा था. साथ ही कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को राफेल पर दिए अपने बयान के लिए सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगनी पड़ी थी. सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला अयप्पा मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश निषेध की परंपरा को भी नकारा दिया है. इस पर दोबारा विचार की मांग की गई तो कोर्ट ने इसे 7 जजों की बेंच को ट्रांसफर करने का फैसला किया

सुप्रीम कोर्ट के लिए 2020 की चुनौतियां
सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या, राफेल और सबरीमाला जैसे बेहद संवेदनशील विवादों पर फैसला तो दे दिया, लेकिन इस वर्ष भी उसके सामने चुनौतियां कम नहीं हैं. इस बार नागरिकता संशोधन कानून की संवैधानिकता का सवाल हल करना है जिसके खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन हुए है. जस्टिस एनवी रमना की अगुवाई में निर्मित एक अन्य संविधान पीठ को 70 साल पुराने आर्टिकल 370 को जम्मू-कश्मीर से निष्प्रभावी करते हुए राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभक्त करने के केंद्र सरकार के फैसले की भी संवैधानिकता पर फैसला देना होगा।

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