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आप भी अगर कूडेदान में फेंक देतें हैं सेनेटरी पैड्स, तो ये जरूर पढ़ लें👇

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गन्दगी किसी को भी पसंद नहीं होती है फिर चाहे वो हमारा घर हो या ऑफिस |अक्सर ऐसा होता है की हम खुद की साफ सफाई के बारे में तो काफी ध्यान देते हैं लेकिन अपने पर्यावरण की सफाई की ओर बिलकुल भी ध्यान नहीं देते और इसकी जिम्मेदारी हम सफाईकर्मियों की समझते है लेकिन हम ये नहीं सोचते की वो सफाईकर्मी भी तो एक इन्सान है जिसे गंदगी नहीं पसंद है लेकिन ये उसकी मजबूरी है की वो आप की गंदगी को साफ करता है इसीलिए हमे इस चीज का ध्यान रखना चाहिए की गंदगी भी ऐसी ना फैलाई जाये जिससे उसे साफ़ करने वाले लोग भी घृणित हो जाएँ |

अक्सर आपने लोगों को ये कहते सुना होगा की लड़के बड़े गंदे होते हैं लेकिन  उन लोगों ने शायद कभी भी  लड़कियों के टॉयलेट यूज नहीं किए होते हैं. कभी-कभी ऑफिस में ऐसा होता है कि लड़कियां टॉयलेट को गंदा छोड़ देती हैं जैसे की पैड्स को बिना कवर किये ही वाशरूम में रख देती हैं जो बेहद ही गंदा काम होता है ऐसे में  हम तुरंत हाउसकीपिंग वाली दीदी के पास जाते हैं. कि आप साफ़ कर दो. क्योंकि हमें लगता है ये उनका काम है.

लेकिन हम एक बार भी नहीं सोचते कि जिनके हवाले हम सारा कचरा कर देते हैं, उनको उसे देखकर कैसा लगता है. कि वो भी इंसान हैं. वो भी दीदियां हैं अपने बच्चों के लिए खाना बनाकर उन्हें स्कूल भेजने वालीं, बिलकुल हमारी माओं की तरह|आज सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही विडियो वायरल हो रहा है जिसे देखने के बाद शायद आप कभी भी  पैड और डायपर को बिना रैप किये हुए नहीं फेकेंगी।

हम बड़ी आसानी से बच्चों के डायपर और अपने सेनेटरी नैपकिन सड़क पर फेंक देते हैं, कचरे में डाल देते हैं. जबकि इनके पैकेट पर साफ़ लिखा होता है कि इन्हें रद्दी कागज़ या अख़बार में लपेटकर फेंकें. जैसे हमारे ऑफिस हमारी काम करने की जगह होते हैं, कचरे के ढेर इनकी काम करने की जगह होते हैं. क्या आपको अपने ऑफिस डेस्क पर बच्चे की टट्टी वाला डायपर और पीरियड के खून वाला नैपकिन देखकर अच्छा लगेगा?

पर्यावरण मंत्रालय ने कचरे के प्रबंध की सरकारी नीति के तहत इस प्रावधान को अनिवार्य कर दिया क्योंकि कूड़ा उठाने  वाले लोग कंडोम, डायपर और पैड को बिनने में हिचकते हैं क्योंकि इन चीजों को लोग सही तरीके से कूड़े में नहीं डालते हैं और इस नए नियमों के तहत कंपनियों, ब्रैंड के मालिकों और मार्केटिंग कंपनियों से उम्‍मीद की गई है कि वे इन उत्‍पादों के सही तरह से डिस्‍पोजल के तौर तरीकों के बारे में आम लोगों को शिक्षित करेंगे।

नए नियम पूरे देश में स्थानीय निकायों द्वारा लागू किए जाएंगे। इसलिए अब इन सारे प्रोडक्ट को बनाने वाली कंपनियों को निर्देश दिये गये हैं कि वो ‘सैनिटरी वेस्ट’ के साथ डिस्पोजल पाउच दें जिसमें यह लिखा हो कि इन सारी चीजों का निपटारा प्रयोग के बाद कैसे करना है|स्थानीय निकायों को बड़े पैमाने पर इस तरह का कचरा पैदा करने वालों से ‘यूजर फी’ चार्ज करने का अधिकार भी दिया गया है। इसके साथ ही इस तरह के कचरे को इधर-उधर फैलाने पर जुर्माना लगाने का अधिकार भी स्‍थानीय निकायों को दिया गया है।

‘सेनेटरी वेस्ट’ की श्रेणी में ‘डायपर्स, सेनेटरी टॉवेल या नैपकिन, कॉटन पैड्स, कंडोम और इसी तरह के दूसरे कचरों’ को शामिल किया गया है। डायपर्स, कंडोम और सैनिटरी पैड्स खुले पड़े हों, तो कचरा बीनने वाले उन्हें उठाने में हिचकते हैं। इसी को लेकर सरकार ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।