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रूस द्वारा बनायी गयी वैक्सीन पर उठनें लगे सवाल, WHO ने लगा दी फटकार……

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कोरोना वैक्सीन विकसित करने के रूस के दावे पर दुनियाभर की निगाहें हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने की घोषणा की रूस ने दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) बना ली है देश में रजिस्टर्ड भी करा लिया है। वहीं, अब इस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की प्रतिक्रिया है। 

WHO ने कहा कि उसे इस वैक्सीन के बारे में कोई जानकारी नहीं है। बिना मंजूरी के दवा का वितरण किया जाना खतरनाक हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि रूस को वैक्सीन के मामले में जल्दबाजी न दिखाने के लिए कहा है उसके इस रवैये को खतरनाक भी बताया है। रूस ने वैक्सीन का नाम अपने पहले सैटेलाइट ‘स्पुतनिक वी’ के नाम पर रखा है। 

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के प्रोफेसर फ्रांसुआ बैलक्स का कहना है कि रशिया का ऐसा करना शर्मनाक है। यह बेहद घटिया फैसला है। ट्रायल की गाइडलाइन को नजरअंदाज करके वैक्सीन को बड़े स्तर पर लोगों को देना गलत है। इंसान की सेहत पर इसका गलत प्रभाव पड़ेगा। जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री जेंस स्पान के मुताबिक, रशियन वैक्सीन की पर्याप्त जांच नहीं की गई। इसे लोगों को देना खतरनाक साबित हो सकता है। वैक्सीन सबसे पहले बने, इससे ज्यादा जरूरी है यह सुरक्षित हो।

दरअसल रूस ने एक वैक्सीन के ट्रायल की जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ साझा नहीं की है। WHO को इस वैक्सीन के तीसरे चरण की टेस्टिंग को लेकर संशय है। उसका कहना है कि अगर किसी वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल किए बगैर ही उसके उत्पादन के लिए लाइसेंस जारी कर दिया जाता है, तो इसे खतरनाक मानना ही पड़ेगा। 

गौरतलब है कि मंगलवार को व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि उन्होंने अपनी दो बेटियों में एक बेटी को पहली वैक्सीन लगवाई है, वह अच्छा महसूस कर रही है। इस वैक्सीन के लिए 1 अरब डोज के लिए उन्हें 20 से अधिक देशों से निवेदन मिल चुका है. उधर WHO ने कहा है कि रूस ने उनके साथ वैक्सीन टेस्टिंग की प्रक्रिया से जुड़ी कोई जानकारी साझा ही नहीं की है। 

वहीं, इस मामले पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि रूस में विकसित कोरोना वैक्सीन के असर की वैज्ञानिक स्तर पर जांच होनी चाहिए। यह वैक्सीन संक्रमण रोकने में कारगर और सुरक्षित साबित होती है तो इसका बड़े पैमाने में उत्पादन करने की क्षमता भारत के पास है। डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि रूस के वैक्सीन के असर की वैज्ञानिक स्तर पर जांच होनी चाहिए। अगर जांच में यह वैक्सीन सुरक्षित और कारगर साबित होती है तो इसका लाभ सभी को मिलना चाहिए।